जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) – विस्तृत सिद्धांत

मनुष्य के फायदे के लिए चीजें बनाने में जीवों के सेल या डीएनए जैसे पदार्थों का इस्तेमाल होता है, यह विज्ञान की एक शाखा है।उपयोगी वस्तुएँ बनाने में जब जीव या उनकी जैविक क्रियाएँ काम आती हैं, इसे जैव प्रौद्योगिकी कहते हैं।

मुख्य बिंदु

  • थोड़े-थोड़े जीव, जैसे बैक्टीरिया या फफूंद, इस काम में आते हैं। पौधों की अलग-अलग कोशिकाओं का भी उपयोग होता है। जानवरों के शरीर से ली गई कोशिकाएँ भी इसमें शामिल हो जाती है ।
  • उत्पादन बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत होती है। गुणवत्ता में सुधार आगे चलकर दिखाई देता है। नई तकनीक का विकास कहीं बीच में शामिल हो जाता है।
  • कभी-कभी तो ये पुराने ढंग की होती है, मसलन दही बनाना। कई वक्त ऐसा भी होता है कि इसमें जीन संशोधन जैसी आधुनिक चीज़ें शामिल हो जाती हैं।

उदाहरण

  • दूध से दही बनाना (किण्वन प्रक्रिया)
  • इंसुलिन का उत्पादन
  • वैक्सीन बनाना
  • कुछ फसलों में बदलाव किया जाता है, उदाहरण के लिए Bt कपास।

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) – विस्तृत सिद्धांत

जीवन के अध्ययन में तकनीक का इस्तेमाल

जीवों के साथ काम करना, या फिर कोशिकाओं के अंदर कुछ बदलना – इस तरह की चीजें जैव प्रौद्योगिकी में शामिल हैं। एंजाइम या डीएनए जैसी छोटी-छोटी चीजों को भी यहाँ इस्तेमाल किया जाता है। मनुष्य के लिए जरूरी चीजें बनाने के लिए ऐसा किया जाता है। कई बार ये चीजें और प्रक्रियाएँ सीधे जीवन से जुड़ी होती हैं।

जैव प्रौद्योगिकी का आधुनिक स्वरूप असल में जीनों के इंजीनियरिंग तथा जैविक प्रक्रियाओं में तकनीकी लाने पर टिका है।

जीवन के नियमों को समझकर उसका इस्तेमाल करना।


(i) आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering)

    बदलाव डीएनए के ढांचे में होता है, जिससे नई खूबियाँ बनती हैं। इसके पीछे का तरीका किसी जीव से जीन निकालकर दूसरे में डालना है।

    (ii) जैव-प्रक्रम अभियांत्रिकी (Bioprocess Engineering)

    उत्पाद तैयार करने में सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल होता है, कभी-कभी कोशिकाओं के जरिए भी। एक बड़े स्तर पर क्रिया चलती है, जैसे किण्वन के माध्यम से एंटीबायोटिक बनना। एंजाइम भी ऐसे ही प्रक्रिया से निकलते हैं, छोटे जीवों के काम करने पर।

    1. आनुवंशिक अभियांत्रिकी की प्रक्रिया

      आनुवंशिक अभियांत्रिकी में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

      • DNA का पृथक्करण
        डीएनए को कोशिका से अलग कर दिया जाता है, फिर उसे साफ़ किया जाता है।
      • DNA का कटाव
        कभी-कभी डीएनए को एकदम ठीक जगह पर काटने में रिस्ट्रिक्शन एंजाइम्स काम आते हैं।
      • एक जीन का दूसरे से जुड़ना लिगेशन कहलाता है।
        एक वाहक के साथ वांछित जीन को DNA ligase नामक एंजाइम से जोड़ा जाता है।
      • स्थानांतरण (Transformation)
        एक प्रतिरूप DNA को आवासीय कोशिका – उदाहरण के लिए जीवाणु – में स्थानांतरित किया जाता है।
      • चयन (Selection)
        ऐसी कोशिकाएँ आगे बढ़ पाती हैं, जहाँ recombinant DNA का प्रवेश हुआ हो।
      • अभिव्यक्ति (Expression)
        जब जीन host cell में प्रवेश करता है, तो वह protein बनाना शुरू कर देता है।

      2. तकनीकी सामान जो जैव अनुसंधान में काम आता है।


      (i) Restriction Enzymes एक तरह के एंजाइम DNA को ठीक-ठाक जगह पर काट देते हैं। लोग उन्हें सूक्ष्मदर्शी कैंची भी बुलाते हैं।

        (ii) DNA Ligase इस एंजाइम का काम डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों को आपस में जोड़ना है। ऐसे में लोग इसे समझते हैं अणुओं की चिपचिपी चिकनी पदार्थ की तरह।

        (iii) Vectors इनके ज़रिए डीएनए एक कोशिका से अगली में जाता है।
        उदाहरण: plasmid, bacteriophage

        (iv) Host Cell जिस कोशिका में recombinant DNA भेजा जाता है, वहीं से प्रक्रिया शुरू होती है।
        उदाहरण: E. coli

        3. पुनः संयोजित डीएनए प्रौद्योगिकी

          इस तकनीक में अलग-अलग जगह से मिला DNA एक साथ मिलाया जाता है, तब नया DNA बनता है।
          दवाओं की तैयारी में इसका सहारा लिया जाता है, हार्मोन बनाने में भी यही होता है काम, वैक्सीन में भी इसकी मौजूदगी देखी जाती है।

          4. पीसीआर पॉलिमेरेज़ चेन रिएक्शन

          एक आसान से तरीके से PCR में DNA की कई प्रतियाँ बनाई जाती हैं, लैब में इसे देखा जा सकता है।
          तीन बड़े कदम इस प्रक्रिया को संभालते हैं।

          • Denaturation (DNA strands अलग होना)
          • गर्मी कम होते ही प्राइमर DNA से चिपक जाते हैं।
          • एक्सटेंशन नया डीएनए बनना
          • डिजीज पता लगाने में इसका इस्तेमाल होता है, साथ ही फॉरेंसिक जांच में भी। DNA के अनुवांशिक चिह्न बनाने के काम में यह आता है।

          5. क्लोनिंग (Cloning)

            एक जीव की ऐसी नकल बनाना, जिसका DNA मूल के बराबर हो, क्लोनिंग कहलाता है।
            Dolly नाम की भेड़ एक साधारण कोशिका के नाभिक को स्थानांतरित कर बनाई गई थी।

            6. जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग


            (i) चिकित्सा क्षेत्र

              • इंसुलिन उत्पादन
              • वैक्सीन निर्माण
              • जीन थेरेपी
              • एंटीबायोटिक उत्पादन

              (ii) कृषि क्षेत्र

              • जीएम फसलों के बारे में
              • कीट-प्रतिरोधी पौधे
              • फसलों की ऐसी किस्में जो ज़्यादा पैदावार देती हैं।

              (iii) औद्योगिक क्षेत्र

              • एंजाइम उत्पादन
              • जैव ईंधन (Biofuel)
              • उत्पादों की बनावट कभी-कभी किण्वन से होती है।

              (iv) पर्यावरण संरक्षण

              • Bioremediation (प्रदूषण नियंत्रण)
              • अपशिष्ट जल उपचार

              7. जीएम फसलें

                जिन फसलों के डीएनए में बदलाव किया जाता है, उनमें अलग-अलग खूबियाँ आ जाती हैं।
                उदाहरण: Bt कपास

                लाभ:

                • कीटों से सुरक्षा
                • अधिक उत्पादन
                • थोड़े से ही रसायनों पर भरोसा।

                8. सुरक्षा के साथ-साथ जीवन पर होने वाले प्रभाव भी सोचने ज़रूरी हैं।

                  • जैव प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने पर कभी-कभी खतरे भी साथ आ जाते हैं।
                  • पर्यावरण पर प्रभाव
                  • जैव विविधता का नुकसान
                  • सेहत को होने वाला खतरा मनुष्य पर असर डाल सकता है।
                  • मोरल बातें हों या सबके मन की परेशानी।
                  • तभी से इसके इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू हुए हैं।

                  9.निष्कर्ष

                    जैव प्रौद्योगिकी एक ऐसा विज्ञान है जो कई दिशाओं में फैला हुआ है। इसने चिकित्सा में काम किया, साथ ही कृषि में भी अपनी छाप छोड़ी। उद्योग के काम में इसका हाथ रहा है, पर्यावरण से भी इसका लेना-देना है। फिर भी, इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी पड़ती है। एक ठीक सा नैतिक तालमेल बनाए रखना जरूरी है।

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