संविधान- मूल अधिकार | Fundamental Rights Notes in Hindi

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मूल अधिकार

अधिकार जो नागरिक को को उनके समर्थक विकास के लिए संविधान के द्वारा प्रदान किए जाते हैं तथा जिन का संरक्षण भी संविधान के अंतर्गत किया जाता है तो उसे मूल अधिकार कहा जाता है।

मूल अधिकारों को देश की मूलभूत विधि अर्थात संविधान में स्थान प्राप्त होता है यह न्यायालय में वाद योग्य होते हैं तथा व्यक्ति एवं राज्य दोनों के विरुद्ध प्राप्त होते हैं अर्थात राज्य के द्वारा भी इनका अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है।

मूल अधिकारों की शुरुआत ब्रिटेन से मानी जाती है जहां पर सर्वप्रथम 1215 इसी में मैग्ना कार्टा कानून के माध्यम से नागरिकों को अधिकार प्रदान किए गए हैं इसके पश्चात 1793 में अमेरिका में नागरिकों को संविधान के द्वारा मान्यता प्राप्त मूल अधिकार प्रदान किए गए इसलिए अमेरिका को मूल अधिकारों का जनक भी कहा जाता है।

भारत में सर्वप्रथम 1895 में तिलक ने स्वराज्य विधेयक के माध्यम से मूल अधिकारों की मांग की गई।

1931 के कांग्रेस के कराची अधिवेशन में भारतीय नागरिकों के लिए मूल अधिकारों की मांग की गई।

जवाहरलाल नेहरू प्रथम भारतीय थे जिन्होंने न केवल स्पष्ट रूप से मूल अधिकारों की मांग की ऑफिस के प्रारूप का भी निर्धारण किया इसलिए जवाहरलाल नेहरू को मूल अधिकारों का जनक भी कहा जाता है तथा इन्होंने मूल अधिकारों को संविधान की अंतरात्मा भी कहा जाता है।

संविधान सभा में सरदार पटेल के नेतृत्व में मूल अधिकार तथा अल्पसंख्यकों की समिति का गठन किया गया जिन की सिफारिश पर संविधान के भाग 03 में तथा अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकारों का उपबंध किया गया जिस का प्रावधान भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका से किया गया।

भारतीय संविधान के प्रमुख मूल अधिकार

  1. समता का अधिकार-स्वतंत्रता का अधिकार शोषण के विरुद्ध अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संस्कृति तथा शिक्षा का अधिकार संवैधानिक उपचारों का अधिकार

समता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18 तक इसके अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि राज्य सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समता तथा कानून का समान संरक्षण उपबंध करवाएगा राज्य सभी व्यक्तियों के लिए क्षमा ढंग से कानून का निर्माण करेगा तथा एक समान तरीके से लागू करवाएगा।

अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष क्षमता तथा विधि के समान संरक्षण

अनुच्छेद 15 – धर्म मूल वंश जाति लिंक तथा जन्म स्थान के आधार पर विविध का प्रतिबंध

राज्य नागरिकों के मध्य केवल धर्म मूल वंश जाति लिंग तथा जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा

2. स्वतंत्रता का अधिकार -अनुच्छेद 19-22

अनुच्छेद 19इस अनुच्छेद में वाक स्वतंत्रता के संरक्षण का अवसर प्रदान किया गया है प्रारंभ में भारतीय संविधान के द्वारा भारतीय नागरिकों को अनुच्छेद 19 (1) के अंतर्गत स्वतंत्रता तथा प्रदान की गई है

विचार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शांतिपर्ण बिना अध्यक्षों के सम्मेलन की स्वतंत्रता समूह संघ स्वतंत्रता समिति बनाने की स्वतंत्रता प्रमाण करने की स्वतंत्रता निवास करने की क्षमता संपत्ति की स्वतंत्रता कोई भी रोजगार तथा कारोबार की स्वतंत्रता

शिक्षा का अधिकार 86 वें संशोधन अधिकार अधिनियम 2002 के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के बालकों को निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का अनुच्छेद 211 के अंतर्गत मूल अधिकार बना दिया गया है इसे लागू करने के लिए 2009 में संसद के द्वारा कानून का निर्माण किया गया तथा 1 अप्रैल 2010 को आरटीई के अंतर्गत भारत में लागू कर दिया गया।

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार अधिनियम अनुच्छेद (23 व 24)

अनुच्छेद 33- के अंतर्गत मनुष्यों का वस्तुओं के प्रांतीय गृह तथा विक्रय बेकार दास प्रथा बंधुआ प्रणाली न्यूनतम परिसर में छह कम पर कार्य कराना आदि को प्रतिबंधित किया गया है संसद के द्वारा इस दिशा में 1948 में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1976 में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम का निर्माण किया गया।

अनुच्छेद 24 – इसके अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बालकों को कारखाना में काम करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है इनका उद्देश्य यह है कि बालकों को शोषण से सुरक्षा कराना तथा स्वास्थ्य का संरक्षण करवाना है।

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28 तक

अनुच्छेद 25-इस अनुच्छेद के अंतर्गत अंतः करण की क्षमता रखता किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता आचरण करने की स्वतंत्रता प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।

अनुच्छेद 26- इस अनुच्छेद के अंतर्गत तार में कार्यों के प्रबंध की व्यवस्था की गई है इसके अंतर्गत प्रत्येक धार्मिक समुदाय को धर्म तथा दान के उद्देश्य से धार्मिक संस्थाओं की स्थापना तथा उसके प्रशासन का निर्माण करना तथा उस संपत्ति का विधि के अनुसार प्रशासन का अधिकार प्रदान किया गया है।

5. संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 32

भारतीय संविधान निर्माताओं के द्वारा मूल अधिकार के संरक्षण को अनुच्छेद में एक मूल अधिकार बना दिया गया है तथा इसके अंतर्गत व्यक्ति अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए उत्तम न्यायालय की शपथ प्राप्त कर सकता है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को भारतीय संविधान की आत्मा हरदी दिल तथा दीवार की संज्ञा प्रदान की गई है अधिकारों के हनन की स्थिति में नागरिक उत्तम तथा उच्च दोनों के प्राप्त कर सकते हैं एवं न्यायालय अनुच्छेद 32 के अंतर्गत तथा उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत अधिकारों के संरक्षण के लिए जा सकता है।

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