जहाँ एक ओर हिमालय की ठंडी चोटियाँ हैं, वहीं दक्षिण में गर्म जंगल भी। इनके बीच भारत की मिट्टी, हवा और ऊँचाई ने पौधों को अपना घर बनाया। फैलाव इतना बड़ा है कि हर मौसम का पौधा यहाँ कहीं न कहीं मिल जाएगा। बर्फ से ढके शिखरों के बाद नम वनों का आगमन होता है। अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के पेड़-झाड़ियाँ अपने आपको ढालते हैं।
भारत की वनस्पति का परिचय
दुनिया भर में भारत ऐसे देशों में गिना जाता है जहाँ प्रकृति की बहुमुखी उपस्थिति चौंकाने वाली है। इस धरती पर 47,000 से ऊपर पौधों के अलग-अलग रूप झलकते हैं। वनस्पतियों का काम केवल हवा को संतुलित रखना नहीं है, इसके अलावा ये इलाज़, कमाई और परंपरा में भी जड़ी हुई है।
हरा पौधों पर असर डालने वाली चीजें :- हवा से लेकर मिट्टी तक, भारत की घास-फूस पर चुपचाप हाथ डालते हैं। ऊँचाई बदले तो पेड़ भी अजीब ढंग से झुक जाते हैं। बारिश कम हो तो पत्तियाँ सूखने लगती हैं, धीरे-धीरे। गर्मी बढ़े तो छाया भी छटपटाने लगती है।
(i) जलवायु
हवा के हालात भारत में गर्म तो हैं, मगर सब जगह एक जैसे नहीं। बारिश, गर्मी और नमी तय करते हैं कि कहाँ कौन सा पेड़-पौधा उगेगा। जहाँ बारिश खूब होती है, वहाँ जंगल घने दिखेंगे, वहीं जहाँ पानी कम पड़ता है, वहाँ झाड़ियाँ और घास का बोलबाला रहता है।
(ii) स्थलाकृति (Relief)
उच्च पहाड़ों में सूई जैसी पत्तियों वाले पेड़ मिलते हैं। मैदानों की अपेक्षा ऊँचाई पर इनकी उपस्थिति सामान्य है। हिमालय में देवदारु, चीड़ और फर के घने जंगल हैं। तलहटी के क्षेत्रों में पतझड़ के मौसम में पत्तियाँ गिर जाने वाले पेड़ प्रभावी है । एक ओर ठंडे क्षेत्र के पेड़, दूसरी ओर गर्म क्षेत्र के। रेगिस्तान में पानी की कमी के कारण कांटेदार पौधे होते हैं। पठार की मिट्टी भी घास और झाड़ियों को पसंद करती है।
(iii) मिट्टी
मिट्टी की उर्वरता व प्रकार से यह तय होता है कि पौधे कैसे बढ़ेंगे। कपास खास तौर पर काली मिट्टी में ठीक से पनपती है, जबकि लाल मिट्टी में दूसरी फसलें आसानी से उग जाती हैं।
(iv) मानव गतिविधियाँ
लकड़ी काटने से जंगल खत्म होते हैं, फिर खेती आगे बढ़ती है। इसके बाद कारखाने बस जाते हैं। शहर धीमे-धीमे घास के मैदानों पर कब्जा कर लेते हैं। पेड़ों की जगह इमारतें ले लेती हैं।
भारत की प्रमुख वनस्पति प्रकार
वनस्पति के मामले में भारत को पाँच हिस्सों में समझा जाता है।
(1) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests)
- हरे-भरे पेड़ों वाले जंगल, जो साल भर ऐसे ही रहते हैं।
- इन जगहों पर ये जंगल मिलते हैं, जहाँ बारिश का आंकड़ा 200 सेमी पार कर जाता है।
- इधर-उधर फैले हुए पहाड़ियों का दौरा शुरू होता है। फिर नज़र आते हैं जंगलों से ढके छोटे-छोटे टापू। वैसे ही कहीं ऊपर उत्तर की ओर घने झुंड में पेड़।
- ऊपर की ओर बढ़ते हुए मोटे पेड़हर साल ये हरेपन में डूबे रहते हैं।
- ऊपर की ओर बढ़ते हुए मोटे पेड़
- हर साल ये हरेपन में डूबे रहते हैं।
- लकड़ी के पेड़ों में महोगनी है। इसके अलावा आबनूस भी शामिल है। तीसरा पेड़ है रोजवुड।
- वैसे जंगल जहां हरियाली मौसम के साथ बदलती है।
- बरसात के जंगलों के नाम से भी इनकी पहचान है।
(2) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests)
- बीच के हिस्से में जमीन फैली है, पर ध्यान दो – उत्तर में कहीं-कहीं टापू सा इलाका।
- विशेषताएँ:गर्मी के मौसम में पत्ते झड़ने लगते हैं, पेड़ों से।
- गर्मी के मौसम में पत्ते झड़ने लगते हैं, पेड़ों से।
- साल के पेड़ हर जगह दिखते हैं। बीच में सागौन भी आ जाता है। नीम कहीं-कहीं अलग तरह से खड़ा रहता है।
(3) कांटेदार वन (Thorn Forests)
- इन्हें सूखे वाले इलाकों में देखा जा सकता है।
- हर साल बारिश होती है पचास सेंटीमीटर से कम।
- स्थान: राजस्थान, गुजरात
- विशेषताएँ:काँटों वाला छोटा सा पेड़।
- काँटों वाला छोटा सा पेड़।
- उन पेड़ों में से एक है बबूल। कैक्टस भी वहाँ पाया जाता है।
(4) पर्वतीय वन (Montane Forests)
- ऊपर जाने पर ये जंगल अलग रूप लेते हैं।
- स्थान: हिमालय क्षेत्र
- विशेषताएँ:जैसे-जैसे ऊपर जाओगे, पेड़-पौधों का चेहरा धीरे-धीरे बदलता नजर आएगा।
- जैसे-जैसे ऊपर जाओगे, पेड़-पौधों का चेहरा धीरे-धीरे बदलता नजर आएगा।
- साइप्रस के पेड़ हवा में झूलते हैं। स्प्रूस कहीं-कहीं जमीन को ढक लेता है। देवदार की छाया में पगडंडियाँ गुजरती हैं।
(5) मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)
- इन्हें समुद्र किनारे वाली जगहों में देखा जाता है, डेल्टा इलाकों में भी ये मौजूद होते हैं।
- स्थान: सुंदरबन (पश्चिम बंगाल), गोदावरी-क्रिष्णा डेल्टा
- विशेषताएँ:खारे पानी में उगने वाले पौधे
- खारे पानी में उगने वाले पौधे
- प्रमुख वृक्ष: सुंदरी
वनस्पति का महत्व
(i) पर्यावरणीय महत्व
- हवा में सांस लेने वाली चीज़ छोड़ती है।
- पेड़ धीरे-धीरे कार्बन डाइऑक्साइड समाते हैं।
- हरियाली मौसम को स्थिर रखने में मदद करती है।
(ii) आर्थिक महत्व
- पेड़ों से लकड़ी मिलती है। कागज भी उन्हीं के बिना नहीं बन पाता। जंगलों की छाल से रबर जैसी चीजें निकलती हैं। कई जरूरी चीजों का आधार वृक्ष होता है।
- औषधियों का उत्पादन
- कृषि में सहायक
(iii) सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
- कुछ पेड़ों का धार्मिक महत्व है।
- ग्रामीण जीवन में वनस्पति का विशेष स्थान है
वनस्पति संरक्षण
- कुछ हद तक संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं। इधर-उधर से प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कम होने के आसार बढ़े है । ऐसे में हरियाली को बचाने की ज़िम्मेदारी कई ओर से संभाली जा रही है। फैलते शहरों के बीच कुछ जगहें हरी-भरी भी रखी गई हैं।
- राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य की स्थापना
- वनों की कटाई पर नियंत्रण
- वृक्षारोपण अभियान
- जागरूकता कार्यक्रम
समस्याएँ और चुनौतियाँ
- वनों पर दबाव डाल रहे हैं इंसान। कभी-कभी आग लग जाती है बेकाबू। धीरे-धीरे घट रही है हरियाली की मात्रा। खतरे में पड़ गए हैं कई पौधे। अपने ठिकाने खो चुके हैं झाड़ियों के रहने वाले।
- वनों की अंधाधुंध कटाई
- जलवायु परिवर्तन
- प्रदूषण
- शहरीकरण
- कई पौधों की जातियाँ अब खतरे में हैं, क्योंकि इन समस्याओं ने उनका रास्ता दुश्वार कर दिया है।
निष्कर्ष
प्रकृति की देन के रूप में भारत में वनस्पति का खास स्थान है। इसकी अलग-अलग तरह की प्रजातियाँ पर्यावरण को संभाले रखती हैं, वैसे ही जैसे इंसानों के जीवन का आधार बनती हैं। एक साथ खड़े होकर इसकी रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। आज अगर पेड़-पौधों की ओर ध्यान दिया जाए, तो आने वाले समय में भी कोई फायदा उठा पाएगा।